हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , देश के हौज़ा ए इल्मिया के प्रबंधक आयतुल्लाह आराफी ने यौमुल कुद्स के वैश्विक मार्च में भाग लिया।
आयतुल्लाह आराफी ने मार्च के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा,इस वर्ष का यौमुल कुद्स मार्च, हाल की घटनाओं और परिस्थितियों के कारण, पिछले सभी वर्षों से आलग है। रहबरे मुअज्जम की पुकार पर लब्बैक कहने के लिए राष्ट्र की इस दुश्मन-शिकन उपस्थिति के लिए उनका आभार व्यक्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रमज़ान युद्ध (ऑपरेशन सच्चा वादा-2) में ईरानी राष्ट्र के प्रतिरोध और दृढ़ता ने करिश्मा पैदा किया और एक नई शक्ति का सृजन किया। उन्होंने कहा,यह शक्ति तीन मूलभूत बिंदुओं में निहित है। पहला, जनता की उपस्थिति और उनकी भागीदारी का वैभव, जो हमेशा जारी रहा है और यौमुल कुद्स मार्च में उनकी आज की उपस्थिति ने इस गौरवशाली राष्ट्र के इतिहास में एक और स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ दिया है।
क़ुम के जुमआ के इमाम ने कहा,सशस्त्र बलों का जबरदस्त प्रतिरोध, इस्लामी गणतंत्र की पवित्र व्यवस्था की शक्ति का दूसरा कारक है, जिसने क्षेत्र और दुनिया के सैन्य और राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है।
उन्होंने इस्लामी व्यवस्था की शक्ति का तीसरा कारक रहबर का चयन बताया और कहा, अल्हम्दुलिल्लाह, इस्लामी व्यवस्था के रहबर का चयन और परिचय, उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, शीघ्रता से किया गया और वर्तमान में व्यवस्था के सभी स्तंभ और सबसे ऊपर रहबरे मुअज्जम देश का संचालन कर रहे हैं और विभिन्न दृष्टिकोणों से देश के प्रशासन में कोई व्यवधान नहीं है।
आयतुल्लाह आराफी ने अंत में जोर देते हुए कहा,यह तीन बिंदु इस्लामी गणतंत्र ईरान की पवित्र व्यवस्था की शक्ति का रहस्य हैं। यानी जनता, सशस्त्र बल और रहबरे मुअज्जम। सभी संस्थानों और जिम्मेदारों को रहबरे इंकिलाब के संदेश और इंकिलाब के मार्ग और आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। इस वर्ष का यौमुल कुद्स पिछले सभी वर्षों से आलग है और महान राष्ट्र ईरान का आभार व्यक्त किया जाना चाहिए।
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